4 दिसंबर 1952 को हिंदी सिनेमा के शोमैन राजकपूर और कृष्णा कपूर के घर जन्मे ऋषि कपूर ने अदाकारी के नए मानक स्थापित किए। सिर्फ अदाकारी ही नहीं, बल्कि और भी कई मामलों में वे हटकर थे। वे खाने-पीने के बेहद शौकीन थे और उतने ही शौकीन वे पहनने-ओढ़ने के मामले में भी थे। उनका फैशन सेंस कमाल का था। ऋषि कपूर ने बाल कलाकार के रूप में करियर की शुरुआत कर दी थी। हालांकि, एक्टर के तौर पर उन्होंने फिल्म ‘बॉबी’ से डेब्यू किया। फिल्म जबर्दस्त हिट रही। पहली ही फिल्म से उन्होंने शोहरत बटोरनी शुरू कर दी। ऋषि कपूर की बर्थ एनिवर्सरी पर पढ़िए उनसे जुड़े किस्से

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राज कपूर की गोद में ऋषि कपूर
– फोटो : सोशल मीडिया
बचपन में ही दिखा दिया अभिनय का कमाल
ऋषि कपूर का जन्म फिल्मी परिवार में हुआ। मानो अभिनय प्रतिभा उन्हें विरासत में मिली और बचपन में ही यह उनके व्यवहार में झलकने लगी थी। कहा जाता है कि अभी उन्होंने चलना शुरू ही किया था कि वे आइने के सामने जाकर तरह-तरह की शक्लें बनाया करते थे। कपूर खानदान की महफिलों में ये कहानी अक्सर सुनाई जाती है कि उन्हीं दिनों एक शाम राज कपूर ने अपने बेटे को अपनी व्हिस्की के गिलास से एक सिप शराब पिलाई और ऋषि ने शीशे के सामने जाकर एक शराबी का अभिनय करना शुरू कर दिया था। ऋषि के अभिनय की शुरुआत उनके बचपने से ही हो गई थी। उनके दादा के नाटक ‘पठान’ में खटिया पर जो बच्चा सोया हुआ दिखाई देता था वो और कोई नहीं ऋषि कपूर थे।

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‘मेरा नाम जोकर’
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अभिनय के चक्कर में स्कूल से कट गया था नाम
ऋषि कपूर जब मुंबई के कैम्पियन स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे, तो उनके पिता राज कपूर ने अपनी आत्मकथात्मक फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ में उन्हें अपने बचपन का रोल दिया। ऋषि शूटिंग के लिए स्कूल नहीं जाते थे। अध्यापकों को ये बात बहुत अखरती। नतीजा ये हुआ कि उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया और राज कपूर को अपने बेटे को दोबारा स्कूल में दाखिल कराने के लिए एड़ी चोटी को जोर लगाना पड़ा।

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‘मेरा नाम जोकर’
– फोटो : सोशल मीडिया
बाल कलाकार के रूप में जीता राष्ट्रीय पुरस्कार
फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ के लिए ऋषि कपूर को सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। बाद में उन्होंने अपनी आत्मकथा खुल्लम खुल्ला में लिखा था, “जब मैं मुंबई लौटा तो मेरे पिता ने उस पुरस्कार के साथ मुझे अपने दादा पृथ्वीराज कपूर के पास भेजा। मेरे दादा ने वो मेडल अपने हाथ में लिया और उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने मेरे माथे को चूमा और भरी हुई आवाज में कहा, ‘राज ने मेरा कर्जा उतार दिया।’

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फिल्म- बॉबी
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पैसे देकर पाया डेब्यू फिल्म के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड
ऋषि कपूर ने बतौर हीरो फिल्म ‘बॉबी’ से डेब्यू किया। ‘बॉबी’ (1973) के लिए उन्होंने बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता, लेकिन ‘खुल्लम खुल्ला’ में उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा किया कि यह अवॉर्ड उन्होंने 30 हजार रुपये देकर खरीदा था। एक पीआर ने उनसे कहा, ‘पैसे दो, अवॉर्ड दिलवाऊंगा।’ उत्साह में युवा ऋषि ने पैसे दे दिए, लेकिन बाद में उन्हें इस बात का अफसोस हुआ।