बुधवार रात को मुंबई में गुरु दत्त का शताब्दी समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर गुरु दत्त को श्रद्धांजलि देने के लिए एक खास सेशन भी रखा गया। इस इवेंट में जावेद अख्तर भी शामिल हुए। इस मौके पर ही जावेद अख्तर ने बताया कि वह गुरु दत्त के साथ काम करना चाहते थे लेकिन यह सपना अधूरा ही रह गया।
जावेद अख्तर का सपना क्यों रह गया अधूरा
कार्यक्रम में जावेद अख्तर ने कहा, ‘मैंने सोचा था ग्रेजुएशन करने के बाद फिल्म इंडस्ट्री में जाऊंगा और कुछ साल गुरु दत्त के साथ काम करूंगा और फिर निर्देशक बन जाऊंगा। जब हम 18 साल के होते हैं तो कई चीजें आसान होती हैं, इसलिए मैंने यही फैसला किया था। लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि मैं 1964 में 4 अक्टूबर को बॉम्बे (मुंबई) आया और 10 अक्टूबर को गुरु दत्त का निधन हो गया। मैं उन्हें कभी नहीं देख पाया।’
वह आगे कहते हैं, ‘मैंने सचमुच सोचा था कि जब मैं बंबई (मुंबई) जाऊंगा तो किसी तरह गुरु दत्त के साथ काम करने का रास्ता निकाल लूंगा क्योंकि साहिर (कवि साहिर लुधियानवी) साहब, गुरु दत्त के अच्छे दोस्त थे और उन्होंने ‘प्यासा’ के लिए गीत लिखे थे। मुझे लगा कि यह जुड़ाव काम करेगा। मैंने सोचा था कि मैं कुछ समय के लिए उनकी मददग करूंगा लेकिन यह बात संभव न हो सकी।’
ये खबर भी पढ़ें: Javed Akhtar: दिलजीत दोसांझ विवाद पर आखिर यह क्या बोल गए जावेद अख्तर, कहा- ‘हिंदुस्तानियों का ही पैसा…’
कॉलेज के दिनों में ही गुरु दत्त से प्रभावित हुए
जावेद अख्तर बताते हैं कि वह कॉलेज के दिनों में ही गुरु दत्त साहब से प्रभावित थे। वह कहते हैं, ‘मैं अपने कॉलेज के दिनों में गुरु दत्त से बहुत प्रभावित था। जब मैं 17 या 18 साल का था, तो मैं कुछ सुपरस्टार्स की फिल्में देखने से मना कर देता था क्योंकि मुझे लगता था कि वे बुरे एक्टर हैं। इसके बाद मेरे पास बहु कम ऑप्शन बचते थे। ऐसे में गुरु दत्त साहब का मुझ पर गहरा असर हुआ। हमारे पास महबूब खान, बिमल रॉय जैसे महान निर्देशक थे, लेकिन गुरु दत्त पहले व्यक्ति थे जो सीन्स के जरिए अपनी बात रखते थे।’
जावेद अख्तर आगे कहते हैं, ‘ऐसे कई निर्देशक थे जो अच्छी एक्टिंग कर सकते थे, सही लोकेशन पर शूटिंग कर सकते थे, फिल्म में सही माहौल बना सकते थे और अच्छी तरह से लिखी गई फिल्में बना सकते थे, लेकिन सीन्स के जरिए बात करना हमें गुरु दत्त ने सिखाया था।’
ये लोग भी कार्यक्रम में हुए शामिल
जावेद अख्तर के अलावा गुरु दत्त के शताब्दी समारोह में सुधीर मिश्रा, हंसल मेहता और आर. बाल्की जैसे और फिल्म मेकर्स भी शामिल हुए। फिल्म क्रिटिक-राइटर भावना सोमैया भी ने भी इस कार्यक्रम में शिरकत की। सभी ने गुरु दत्त को याद किया, उनके निर्देशन, अभिनय को लेकर लंबी बातचीत की। यह कार्यक्रम ‘प्यासा’ फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग के साथ खत्म हुआ। इस स्क्रीनिंग में गुरु दत्त के परिवार के सदस्य शामिल हुए, जिनमें उनकी पोतियां गौरी और करुणा दत्त, दिवंगत एक्टर जॉनी वॉकर के बेटे नासिर, फिल्म मेकर अनुभव सिन्हा, एक्टर अक्षय ओबेरॉय भी शामिल हुए।