‘नवरात्रि के पहले दिन मुझे सबसे ज्यादा खुशी तब हुई जब मेरी बेटी अपनी नैनी (हेल्पर) के साथ पड़ोस में जाकर डांडिया और गरबा कर रही थी। मेरा मानना है कि ऐसे त्योहार समुदाय को जोड़ते हैं, पड़ोसियों से बातचीत बढ़ाते हैं और एक-दूसरे की संस्कृति का हिस्सा बनने का मौका देते हैं। अपनी बेटी को इस तरह उत्साह और खुशी के साथ जुड़े देखना बेहद सुखद अनुभव था।’

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बचपन में सोचती थी- काश मेरे दस हाथ होते


‘बचपन में हमें नवरात्रि के मौके पर बुराई पर अच्छाई की जीत की कहानी सुनाई जाती थी। मां दुर्गा का चित्र मुझे सबसे शक्तिशाली लगता था। मुझे यह देखकर आश्चर्य होता था कि उनके दस हाथ हैं। मैं सोचती थी कि काश मेरे भी दस हाथ होते। मां दुर्गा को नए कपड़े पसंद हैं तो नए कपड़े पहनते थे। ये यादें मुझे हमेशा देवी की शक्ति की याद दिलाती हैं।’

मां बनने के बाद बदल जाता है जीवन


‘मातृत्व आपके जीवन को पूरी तरह से बदल देता है। कलाकार के रूप में काम करते हुए रात में जागना और दौड़ भाग करना अलग है, पर जब आप मां बन जाते हैं तो फिर आप अपने बच्चे के अनुसार दिनचर्या बनाते हैं। यह आपको सशक्त और आत्मनिर्भर बनाता है। मातृत्व ने मुझे सिखाया कि मेरा शरीर कितना मजबूत है और यह कितना सह सकता है…बच्चे को नौ महीने तक पालना और फिर उसे जन्म देना। मेरे लिए यह नारी शक्ति का उत्सव है। यह गर्भ और पोषण की शक्ति है।’



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