71वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड पाने के बाद विक्रांत मैसी चर्चा में हैं। इस उपलब्धि से वह काफी खुश हैं। लेकिन असल में उनके लिए सफलता के मायने बिल्कुल अलग हैं। श्रीश्री रविशंकर के रोल को निभाने के बाद वह कैसा फील कर रहे हैं, इस बात का भी जिक्र विक्रांत मैसी ने किया है। 

विक्रांत के लिए बदल गए सफलता के मायने 


दिल्ली में एएनआई से बातचीत करते हुए विक्रांत कहते हैं, ‘20 साल पहले जब मैंने शुरुआत की थी तो सफलता की परिभाषा अलग थी। आज मेरे लिए इसका मतलब है वो जिंदगी जीना जिसका मैंने हमेशा सपना देखा था। इसका मतलब यह नहीं कि अवॉर्ड जीत जाऊं या मशहूर हो जाऊं। बस वो जिंदगी जीनी है जो हमेशा से जीना चाहता था। परिवार साथ हो और चैन की नींद सो सकूं। अपने बच्चे की परवरिश कर पाऊं। दुनिया घूमने जाऊं। अपनी छोटी-छोटी ख्वाहिशों को पूरा कर कर सकूं। यही सफलता है।’ 

 

 

श्रीश्री रविशंकर की बायोपिक को लेकर क्या कहा 


श्रीश्री रविशंकर की बायोपिक में काम करने के अपने एक्सपीरियंस को भी विक्रांत शेयर करते हैं। वह कहते हैं, ‘यह एक बहुत ही खास फिल्म है। मैं गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर जी का रोल निभा रहा हूं। यह फिल्म पूरी तरह से दक्षिण अमेरिका के कोलंबिया में सेट है और 52 वर्षों तक चले गृहयुद्ध पर बेस्ड है। यह फिल्म दिखाती है कि कैसे गुरुदेव रविशंकर जी ने अहिंसा और क्षमा के भारतीय मूल्यों के माध्यम से वहां शांति की शुरुआत की। इस फिल्म का मकसद लोगों को सशक्त बनाना और गुरुदेव के योगदान पर चर्चा करना है। इस रोल को लेकर बहुत दबाव में हूं। अभी तक निर्माता और निर्देशक की ओर से कोई शिकायत नहीं आई है। अभी तक सब कुछ अच्छा चल रहा है।’  

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