इमेज स्रोत, Reutersइमेज कैप्शन, स्क्रूवर्म मक्खियां खुले घाव पर अंडा देती हैं, जिनसे ये कीड़े निकलते हैं12 मिनट पहलेअमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ़ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज़ ने रविवार को न्यू वर्ल्ड स्क्रूवर्म का पहला इंसानी मामला दर्ज किया.मांस खाने वाला यह पैरासाइट अल-साल्वाडोर से लौटे एक मरीज़ में पाया गया. अल-साल्वाडोर अभी न्यू वर्ल्ड स्क्रूवर्म से प्रभावित देशों में शामिल है.अमेरिका की पब्लिक हेल्थ एजेंसी सेंटर्स फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने 4 अगस्त को इस मामले की पुष्टि की थी.बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करेंस्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि मरीज़ पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है और किसी दूसरे इंसान या जानवर में इस स्क्रूवर्म के फैलने का कोई सबूत नहीं मिला है.न्यू वर्ल्ड स्क्रूवर्म क्या है?इमेज स्रोत, Getty Imagesइमेज कैप्शन, स्क्रूवर्म पैरासाइट मक्खियों के अंडे से निकलते हैं.अमेरिकी कृषि विभाग की एनिमल एंड प्लांट हेल्थ इंस्पेक्शन सर्विस के मुताबिक़, न्यू वर्ल्ड स्क्रूवर्म एक खतरनाक कीड़ा है.स्क्रूवर्म मक्खियां आकार में घरेलू मक्खियों जैसी होती हैं या उनसे थोड़ी बड़ी हो सकती हैं. ये मक्खियां नीले या हरे रंग की होती हैं और इनके पीछे के हिस्से पर तीन काली धारियां होती हैं. इन मक्खियों की आंखें नारंगी रंग की होती हैं.स्क्रूवर्म मवेशियों, पालतू जानवरों, जंगली जीवों, कभी-कभी पक्षियों और बहुत ही दुर्लभ मामलों में इंसानों में भी पाया जा सकता है. इनके लार्वा जब जिंदा जीव के मांस में घुसते हैं तो गंभीर और कई बार जानलेवा नुक़सान पहुंचाते हैं.न्यू वर्ल्ड स्क्रूवर्म के मामले क्यूबा, हैती, डोमिनिकन गणराज्य और दक्षिण अमेरिकी देशों में देखे जाते हैं.कैसे फैलता है स्क्रूवर्म?इमेज स्रोत, Reutersइमेज कैप्शन, आमतौर पर ये जानवरों में फैलते हैंमादा स्क्रूवर्म मक्खियां जानवरों के घाव पर अंडे देती हैं. अंडों से निकलने के बाद सैकड़ों लार्वा मांस के अंदर घुस जाते हैं. अगर इलाज न किया जाए तो इनकी वजह से मौत भी हो सकती है.इसका नाम ‘स्क्रूवर्म’ इसलिए पड़ा क्योंकि ये कीड़े घाव में ऐसे घुसते जाते हैं जैसे लकड़ी में पेंच (स्क्रू) घुसता है.मवेशियों और वन्य जीवों के लिए यह काफ़ी ख़तरनाक हो सकता है और दुर्लभ मामलों में इंसानों को भी प्रभावित कर सकता है. खुले घाव वाले इंसानों में इसके फैलने का ख़तरा ज़्यादा होता है, ख़ासकर तब जब वे प्रभावित देशों की यात्रा करें या ऐसे मवेशियों के संपर्क में आएं जिनमें स्क्रूवर्म मौजूद हो.इलाज का एकमात्र तरीका है कि घाव से सभी लार्वा को हटाकर उसे पूरी तरह साफ़ किया जाए. अगर समय पर इलाज हो जाए तो संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है.अमेरिका में स्क्रूवर्म का इतिहासइमेज स्रोत, AFPइमेज कैप्शन, मवेशियों में इस पैरासाइट के फ़ैलने का ख़तराअमेरिकी कृषि विभाग के अनुसार, 1933 में इससे प्रभावित पशुओं के ज़रिए स्क्रूवर्म देश के दक्षिण-पश्चिम से दक्षिण-पूर्वी हिस्सों तक फैल गया था. 1934 तक मिसिसिप्पी, अलाबामा, नॉर्थ कैरोलिना, साउथ कैरोलिना, जॉर्जिया और फ़्लोरिडा में इसके मामले सामने आए.1960 के दशक में अमेरिका से स्क्रूवर्म को पूरी तरह ख़त्म कर दिया गया था. इसके लिए शोधकर्ताओं ने बड़ी संख्या में नर स्क्रूवर्म की नसबंदी की थी. इन नर मक्खियों और जंगली मादा मक्खियों से केवल इनफ़र्टाइल अंडे बने यानी ऐसे अंडे जो विकसित नहीं हो सकते थे. इस तरह स्क्रूवर्म का उन्मूलन किया गया.इसका हालिया प्रकोप 2023 में पनामा से शुरू हुआ. इस साल जुलाई में मेक्सिको ने अमेरिकी सीमा से लगभग 595 किलोमीटर दक्षिण में इसका नया मामला दर्ज किया. इसके बाद अमेरिकी कृषि विभाग ने दक्षिणी पोर्ट से मवेशियों के आयात पर रोक लगा दी.कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक़, अमेरिका हर साल मेक्सिको से 10 लाख से ज़्यादा मवेशी आयात करता है. ऐसे में स्क्रूवर्म का प्रकोप गंभीर आर्थिक नुक़सान पहुंचा सकता है. इससे मवेशी उद्योग से जुड़ी 100 अरब डॉलर से अधिक की आर्थिक गतिविधि को ख़तरा हो सकता है.हालांकि अधिकारियों का कहना है कि फ़िलहाल इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जोखिम ‘बहुत कम’ है.बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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