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सुंदर दिखने के लिए युवाओं में बोटॉक्स का बढ़ता चलन, लेकिन क्या हैं इसके ख़तरे?



इमेज स्रोत, Sydney Brownइमेज कैप्शन, सिडनी ब्राउन का कहना है कि उन्होंने और उनकी सहेली ने आत्मविश्वास हासिल करने के लिए बोटॉक्स कराया….मेंAuthor, रुथ क्लेगपदनाम, बीबीसी संवाददाता26 अगस्त 2025कुछ साल पहले सिडनी ब्राउन की मां ने वीडियो कॉल के दौरान अपनी बेटी के माथे पर झुर्री जैसी रेखा देखी.इसके बाद उन दोनों ने मिलकर तय किया कि इसका उपाय एंटी-रिंकल इंजेक्शन लेने में है. सिडनी ने उसे लेना शुरू किया. उस समय सिडनी की उम्र 23 साल थी. सिडनी अब 25 साल की हैं और वो बोटॉक्स और लिप फिलर करवा चुकी हैं. वो अपने इस फ़ैसले से बेहद खुश हैं.सिडनी के मुताबिक़ आत्मविश्वास से भरा महसूस करने के लिए जो भी करना पड़े वो करना चाहिए. उनकी मां डॉक्टर हेले ब्राउन अवॉर्ड विनिंग प्लास्टिक सर्जन हैं और अमेरिका के लास वेगास में रहती हैं. वो रोजाना अपनी बेटी के माथे पर थोड़ी मात्रा में बोटॉक्स इंजेक्ट करती हैं.बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करेंयुवाओं के बीच बढ़ती लोकप्रियताइमेज स्रोत, Dr Hayley Brownइमेज कैप्शन, हेले ब्राउन ख़ुद प्लास्टिक सर्जन हैं और उन्हें अपनी बेटी के बोटॉक्स लेने से कोई परहेज़ नहीं हैहेले ब्राउन कहती हैं कि इससे सिडनी कम थकी हुई नज़र आती हैं, ज़्यादा आत्मविश्वास महसूस करती हैं और संभवतः भविष्य में उन्हें गहरी झुर्रियों को हटाने के लिए बड़े ऑपरेशन की ज़रूरत भी नहीं पड़ेगी.सिडनी जिस तरह के एंटी-रिंकल इंजेक्शन का इस्तेमाल करती हैं, उसे ‘प्रिवेंटिव बोटॉक्स’ कहा जाता है. दरअसल 20-30 आयुवर्ग के बोटॉक्स यूजर्स को उम्मीद है कि ऐसा करने से झुर्री वाली रेखा को पहले तो बनने से ही रोका जा सके या हल्की सिलवट को झुर्री बनने से पहले ही नियंत्रित कर लिया जाए.लेकिन सवाल यह है कि बुढ़ापा तो हमारे जीवन का स्वाभाविक हिस्सा है, तो क्या ऐसे कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट्स वाकई हमें जवान बनाए रखने के लिए समझदारी वाले उपाय हैं? या फिर हम केवल अपनी असुरक्षाओं पर फल-फूल रही एक विशाल इंडस्ट्री में हज़ारों रुपये खर्च कर रहे हैं?इसी सवाल का जवाब पाने के लिए मैंने बोटॉक्स यूजर्स और एक्सपर्ट्स दोनों से बात की.जितना कम आप अपनी मांसपेशियों को सिकोड़ते हैं, उतनी ही कम त्वचा पर सिलवटें पड़ती हैं और झुर्रियां उभरती हैं.कभी झुर्रियों को रोकने वाली सुविधा अमीरों या बड़ी हस्तियों की दुनिया तक ही सीमित थी लेकिन आज ये एक इंडस्ट्री का रूप ले चुकी है.ब्रिटेन में हर साल क़रीब 9 लाख बोटॉक्स इंजेक्शन लगाए जाते हैं. दुनिया भर में 18 से 34 साल के युवाओं के बीच कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट्स की लोकप्रियता बढ़ रही है, और ऐसे ट्रीटमेंट लेने वाले कुल लोगों में से 25 प्रतिशत इसी आयु वर्ग से आते हैं. इमेज स्रोत, Ruth clegg/BBCइमेज कैप्शन, 26 साल के वेन ग्रेसू दो साल से बोटॉक्स का इंजेक्शन लगवा रहे हैंउत्तरी मैनचेस्टर के प्रेस्टविच इलाके में रोशनी से जगमगाते एक क्लिनिक में डॉक्टर जावेद हुसैन अपने एक क्लाइंट का इंतज़ार कर रहे हैं. वो नियो डर्म नाम की अपनी कंपनी के डॉक्टर और मेडिकल डायरेक्टर भी हैं. वहीं, 26 साल के वेन ग्रेसू दो साल से यहां बोटॉक्स के लिए आ रहे हैं.वेन डॉक्टर को ध्यान से बताते हैं कि इस बार उन्हें कहां इंजेक्शन चाहिए. वो अपनी भौंहें ऊपर उठाते हैं और त्वचा पर बनी रेखाओं की ओर इशारा करते हैं.इंजेक्शन हाथ में थामे, डॉ. हुसैन मुस्कुराते हुए कहते हैं, “थोड़ी-सी तेज़ चुभन महसूस होगी.. और बस हो गया, कुछ ही सेकेंड्स में.”वेन ज़रा भी सिहरते नहीं दिखते.वेन का माथा थोड़ा सा लाल दिखता है, वो अपना सिर पीछे करते हुए मुझसे बात करते हैं.वो कहते हैं, “मुझे पता है कि मैं जवान हूं. लेकिन ये उम्र वाला फ़ैक्टर नहीं है. मैं इसे आगे झुर्रियां रोकने के लिए इस्तेमाल कर रहा हूं.”वो कहते हैं, “झुर्रियां न होना मुझे आत्मविश्वास देता है, यह मेरी नौकरी में मदद करता है और मैं बेहतर तरीके से बूढ़ा होना चाहता हूं.”अब तक वेन इस इलाज पर हज़ारों पाउंड खर्च कर चुके हैं. वो एक बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर हैं और नियो डर्म के लिए भी काम करते हैं. उनका कहना है, “ये मेरे आत्मविश्वास में किया गया निवेश है और ये पूरी तरह से पैसा वसूल है.”झुर्रियों पर किस तरह से होता है असरइमेज स्रोत, Ruth Clegg/BBCइमेज कैप्शन, डॉक्टर जावेद के मुताबिक़ हाल के दिनों में 18-19 साल के युवाओं की संख्या भी बढ़ी है जो इस ट्रीटमेंट के लिए आ रहे हैंअब यहां पर सवाल ये है कि जब झुर्रियां अभी आई ही नहीं, तो फिर चेहरे में बोटुलिनम टॉक्सिन इंजेक्ट करने से बुढ़ापे की प्रक्रिया कैसे धीमी होती है?इसका जवाब डॉक्टर हुसैन देते हैं. वो कहते हैं, “यह आपको बूढ़ा होने से नहीं रोकता, लेकिन उसकी गति को ज़रूर धीमा कर देता है.”उनका कहना है कि जब हम चेहरे पर हाव-भाव बनाते हैं तो जो अस्थायी सिलवटें पड़ती हैं, उन्हें डायनेमिक रिंकल्स कहते हैं. इन्हें टारगेट करने से लंबे समय में स्थायी रेखाएं (स्टैटिक लाइन्स) कम हो जाती हैं.वो कहते हैं, “जब हम उन मांसपेशियों को ढीला कर देते हैं जो सिकुड़कर झुर्रियां पैदा करती हैं, तो त्वचा की सिकुड़न में भी कमी आती है और इसी वजह से वे लकीरें गहरी होने से बच जाती हैं.”डॉ. हुसैन बताते हैं कि हाल के दिनों में 18-19 साल के युवाओं की संख्या भी बढ़ी है जो इस ट्रीटमेंट के लिए आ रहे हैं. हालांकि कानूनी रूप से 18 साल से ऊपर किसी को भी ये इंजेक्ट किया जा सकता है लेकिन वो खुद कई बार ऐसे युवाओं को मना कर देते हैं.”मेरे पास कुछ लड़कियां आईं जो बोटॉक्स और लिप फिलर चाहती थीं-कुछ तो 3 या 4 मिलीलीटर तक फिलर मांग रही थीं. यह बहुत ज़्यादा है, ख़ासकर तब जब उन्होंने पहले कभी कोई ट्रीटमेंट न करवाया हो.”हालांकि, हर कोई डॉ. हुसैन से सहमत नहीं है कि प्रिवेंटिव बोटॉक्स झुर्रियों को रोकने का कारगर तरीका है.ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ़ एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जन्स (बीएएसपीएस) की अध्यक्ष और कंसल्टेंट प्लास्टिक सर्जन नोरा न्यूजेंट इतनी कम उम्र में बोटॉक्स लेने की सलाह नहीं देतीं. उनका कहना है कि बहुत जल्दी शुरुआत करना पैसे की बर्बादी है.वो कहती हैं, “जो चीज़ अभी है ही नहीं, उसका इलाज नहीं किया जा सकता. 20वें साल में जब ठीक करने के लिए कुछ होता ही नहीं, तब बोटॉक्स लेने का मतलब है कि बिना लाभ के ही बहुत पैसे खर्च करना.”झुर्रियों के बारे में सोचना कितना उचितइमेज स्रोत, Dr Hayley Brownइमेज कैप्शन, सिडनी ब्राउन (दाएं) ने इस इलाज के लिए अपनी मां पर पूरा भरोसा कियावह चाहती हैं कि क्लाइंट्स तब आएं जब चेहरे पर हल्की रेखाएं उभरनी शुरू हों. उस समय वह देख सकती हैं कि चेहरे पर उम्र किस तरह असर डाल रही है और उसी हिसाब से ट्रीटमेंट भी कर सकती हैं.उनका कहना है, “अपने रूप-रंग की परवाह करने या एस्थेटिक ट्रीटमेंट कराने में कोई बुराई नहीं है. लेकिन यह ज़रूरी है कि ऐसा सही कारणों से किया जाए.”कई बार यह दोस्तों या समाज के दबाव में लिया गया फ़ैसला भी बन जाता है, जबकि एस्थेटिक का मक़सद अपनी पसंद से ऐसे फ़ैसले लेना होना चाहिए, जो आपको अपने बारे में बेहतर महसूस कराए न कि किसी दबाव में आकर आप ऐसा करें.यही दबाव जेन टोमी जैसे विशेषज्ञों को भी परेशान कर रहा है. वो न्यूट्रिशन और ईटिंग डिसऑर्डर थेरेपिस्ट हैं और स्कूलों में बॉडी इमेज को लेकर लेक्चर देती हैं.वो कहती हैं, “हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं, जहां एंटी-एजिंग के प्रति एक हद का जुनून है. किशोर स्टूडेंट्स में बोटॉक्स और फिलर्स का चलन बढ़ रहा है.”जेन को डर है कि इसका असर लंबे समय में उनकी मानसिक सेहत पर पड़ेगा. वह बच्चों को यह सिखाने की कोशिश करती हैं कि वे अपनी शारीरिक बनावट से इतर अपनी अन्य सकारात्मक खूबियों पर ध्यान दें.उनका कहना है, “उन्हें अभी से झुर्रियों के बारे में सोचना ही नहीं चाहिए.”एक्सपर्ट की राय ज़रूर लेंइमेज स्रोत, Getty Imagesएश्टन कॉलिन्स, सेव फ़ेस नामक संगठन की डायरेक्टर हैं. ये संगठन कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में बेहतर नियम और नियंत्रण की मांग करता है.वह बताती हैं कि उन्होंने 18 साल तक के बोटॉक्स संबंधी दिक्कतों वाले ऐसे मरीज़ देखे हैं जो ‘अनैतिक विशेषज्ञों’ की वजह से बुरी स्थिति का शिकार हुए. वो कहती हैं, “मुझे इस बात की गंभीर चिंता है कि प्रिवेंटिव बोटॉक्स को किस तरह मार्केट किया जा रहा है. सोशल मीडिया पर जो पोस्ट्स युवा महिलाओं को टारगेट कर दबाव बनाती हैं, वे उन्हें ऐसी प्रक्रियाओं की ओर धकेल रही हैं जिनकी उन्हें असल में ज़रूरत ही नहीं है.”एश्टन चेतावनी देती हैं कि बोटॉक्स अगर सावधानीपूर्वक न किया जाए, तो लंबे समय में इसका ग़लत असर हो सकता है. इनमें बदले हुए चेहरे के हावभाव, असमान चेहरा और कुछ मामलों में मांसपेशियों की कमजोरी (एट्रॉफ़ी) शामिल हैं, जिसे ठीक होने में कई साल लग सकते हैं.वह यह भी कहती हैं कि इतनी कम उम्र में बोटुलिनम टॉक्सिन लेना शरीर में उसके प्रति सहनशीलता (टॉलरेंस) पैदा कर सकता है. उन्होंने खुद 26 साल की उम्र में बोटॉक्स शुरू किया था और अब 37 की उम्र में, उन्हें यह पहले से कहीं ज़्यादा बार करवाना पड़ रहा है क्योंकि इसका असर बहुत जल्दी ख़त्म हो जाता है.विशेषज्ञों की राय अलग-अलग हो सकती है कि बोटॉक्स झुर्रियों को रोकने में कितना सक्षम है, लेकिन सभी इस बात से सहमत हैं कि नियमित क्लीज़िंग, मॉइश्चराइजिंग और रोजाना सनस्क्रीन लगाने से त्वचा को समय से पहले बूढ़ा होने से बचाया सकता है.वहीं, अगर कोई बोटॉक्स जैसे ट्रीटमेंट करवाना ही चाहता है, तो यह ज़रूरी है कि वह किसी मेडिकल बैकग्राउंड वाले, मान्यता प्राप्त प्रैक्टिशनर से ही करवाए.केवल कुछ महीने तक रहता है असरइमेज स्रोत, Getty Imagesअगर पूरी ज़िंदगी भर नियमित रूप से बोटॉक्स लिया जाए तो क्या होता है. इस पर अभी कोई ठोस शोध उपलब्ध नहीं है.किसी ऐसे समूह को तलाशना, जिस पर दशकों तक अध्ययन किया जा सके, ये बेहद मुश्किल है. त्वचा की सेहत कई चीजों पर निर्भर करती है. जैसे आपकी जीवनशैली कैसी है, माहौल कैसा है, तनाव कितना है. आपका खान-पान किस तरह का है और एक्सरसाइज कितना करते हैं.ये सारी चीजें हमारी त्वचा की उम्र तय करने में भूमिका निभाती हैं. बोटॉक्स का असर सिर्फ़ तीन से छह महीने तक रहता है इसलिए किसी भी दीर्घकालिक अध्ययन में यह सुनिश्चित करना होगा कि यूजर्स लगातार ये लेते रहें.असली चुनौती यहां आती है. झुर्रियों से लड़ाई असल में बार-बार की जाने वाली जंग है. एक बार ट्रीटमेंट शुरू कर दिया तो कुछ ही महीनों बाद उसका असर ख़त्म हो जाता है और आपको बार-बार इसे दोहराना पड़ता है.सिडनी आगे भी एंटी-रिंकल इंजेक्शन लेती रहेंगी. उन्हें अपनी मां पर पूरा भरोसा है कि वो उन्हें युवा और कुदरती तौर पर सुंदर दिखने में मदद करेंगी.वह कहती हैं कि उनकी मां उन्हें ज़रूरत से ज़्यादा बोटॉक्स लेने से रोकेंगी और इस स्थिति से भी बचाएंगी जब कोई अपने ही चेहरे में आए बदलावों को पहचान नहीं पाता, जिसे “बोटॉक्स ब्लाइंड” या “फिलर ब्लाइंड” कहा जाता है.”मैं बस थोड़ा-सा ही करवाती हूं और आगे भी ज़रूर करवाती रहूंगी. इसे लेना बेहद आसान है, मेरी मां जानती हैं कि क्या करना है, और इसे लेने से मैं खुद को कहीं ज़्यादा आत्मविश्वासी महसूस करती हूं. “बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित



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