इमेज स्रोत, Getty Imagesइमेज कैप्शन, कई सब्ज़ियों को ज़्यादा देर तक पकाने से उनमें मौजूद विटामिन नष्ट हो जाते हैं (सांकेतिक तस्वीर)….मेंखाना बनाते समय हरी सब्ज़ियों को देखकर अक्सर यह सवाल मन में आता है कि इन्हें पकाने से विटामिन और मिनरल जैसे पोषक तत्वों की मात्रा कम तो नहीं हो जाएगी. तो क्या सब्ज़ियों को बिना पकाए ही खाना सेहत के लिए ज़्यादा फ़ायदेमंद है?असल में, सब्ज़ियों को पकाने से कुछ विटामिन्स और मिनरल्स कम हो सकते हैं, लेकिन कई बार पकी हुई सब्ज़ियों के पोषक तत्व हमारे शरीर में आसानी से एब्ज़ॉर्ब (अवशोषित) हो जाते हैं.कई सब्ज़ियाँ ऐसी होती हैं जिन्हें पकाए बिना नहीं खाया जा सकता है या जिन्हें बिना पकाए नहीं खाना चाहिए. वहीं कुछ सब्ज़ियों को कच्चा भी खाया जा सकता है.तो आइए जानते हैं कि कौन-सी सब्ज़ियाँ बिना पकाए खाना बेहतर हैं और कब उन्हें पकाकर खाना चाहिए.बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करेंकौन-सी सब्ज़ियाँ कच्ची खानी चाहिए?इमेज स्रोत, Getty Imagesइमेज कैप्शन, कई सब्ज़ियों को बिना पकाए भी खाया जा सकता हैपकाने से सब्ज़ियों के पोषण तत्व कम हो सकते हैं. ख़ासकर विटामिन सी, विटामिन बी और पोटैशियम जैसे मिनरल्स पर इसका असर पड़ता है, क्योंकि ये पानी में घुलनशील होते हैं और पकाने के दौरान पानी में घुल जाते हैं.सूप और स्ट्यू बनाने पर यह ठीक है, क्योंकि उसमें आप सब्ज़ियों के साथ उसका पानी (ग्रेवी) भी पी लेते हैं. लेकिन अगर वह पानी फेंक दिया जाए तो समस्या हो जाती है.ब्रोकली, फूल गोभी, पत्ता गोभी, तोरी, पालक और मटर में ये पोषक तत्व अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं.गर्मी (हीट) इन पोषक तत्वों को कमज़ोर कर देती है, इसलिए ऐसी सब्ज़ियों को धीरे-धीरे और कम पानी में पकाना चाहिए. उबालने के बजाय इनकी स्टीमिंग या माइक्रोवेव में पकाना बेहतर विकल्प है.ऑनलाइन वेलनेस प्लेटफ़ॉर्म ‘मेटामॉरफोसिस’ की संस्थापक और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट दिब्या प्रकाश कहती हैं, “कई ऐसी सब्ज़ियाँ हैं जो अधिक तापमान नहीं सह सकतीं और उनके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं. इसलिए अलग-अलग सब्ज़ियों से पूरा लाभ लेने के लिए उन्हें खाने का तरीक़ा भी अलग होना चाहिए.””जैसे गाजर को आप बिना पकाए खा सकते हैं, जबकि बुज़ुर्गों को इसे हल्का स्टीम करके देना बेहतर है. इसी तरह टमाटर को गर्म पानी में डालकर उसका छिलका उतार सकते हैं. जिन लोगों को पथरी की समस्या या आशंका है, वे इसके बीज निकालकर इस्तेमाल करें और टमाटर को पकाते समय अंत में डालें ताकि इसमें मौजूद लाइकोपीन (एंटीऑक्सीडेंट) पूरी तरह नष्ट न हो.”कुछ सब्ज़ियाँ पकने के बाद ज़्यादा पौष्टिक हो जाती हैं, क्योंकि उन्हें पकाने से उनके सेल्स टूटते हैं और शरीर के लिए उनमें मौजूद पोषक तत्वों को अवशोषित करना आसान हो जाता है.अगर पकाते समय कुछ पोषक तत्व कम भी हो जाएं, तब भी इन सब्ज़ियों को पकाकर खाना ही ज़्यादा बेहतर होता है.स्टार्च और प्रोटीन वाली सब्ज़ियों को पकाकर ही आसानी से पचाया जा सकता है.अगर आप सब्ज़ियों को कच्चा खाने के बारे में सोचते हैं, तो ध्यान रखें कि आलू जैसी स्टार्च वाली कुछ सब्ज़ियाँ कच्ची नहीं खाई जा सकतीं.’खाना पकाना एक कला ही नहीं, विज्ञान भी है’इमेज स्रोत, Getty Imagesइमेज कैप्शन, सब्ज़ी या कोई भी खाना पकाने में कई बातों का ध्यान रखना ज़रूरी होता है (सांकेतिक तस्वीर)कई सब्ज़ियाँ ऐसी होती हैं जो गर्मी सहन नहीं कर पातीं, यानी ज़्यादा गर्म करने से उनके विटामिन पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं. विटामिन सी वाली सब्ज़ियों का ज़िक्र इसमें काफ़ी अहम है.मसलन, अगर हम आंवले की बात करें तो यह ज़्यादा देर तक गर्मी नहीं सह पाता और इसके विटामिन नष्ट हो सकते हैं. लेकिन आंवला स्वाद में कसैला और खट्टा होता है, इसलिए इसे स्टीम करके खाना बेहतर विकल्प है.हम गाजर, मूली, खीरा, ककड़ी, चुकंदर और प्याज़ जैसी कई सब्ज़ियों को बिना पकाए खा सकते हैं ताकि इनमें मौजूद विटामिन और मिनरल का पूरा लाभ मिल सके.दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर मोहसिन वली कहते हैं, “लौकी, तोरी और पालक जैसी सब्ज़ियों को पकाकर या उबालकर खाना चाहिए. लेकिन अक्सर हम इन्हें बार-बार पकाकर उनके सारे पोषक तत्व ख़त्म कर देते हैं.”खाना पकाने के दौरान तरीक़ा काफ़ी मायने रखता है, ताकि पोषक तत्व पूरी तरह नष्ट न हों.अगर सब्ज़ियों को बहुत देर तक पकाया जाए तो उनमें मौजूद विटामिन पूरी तरह ख़त्म हो सकते हैं और तब हमें सब्ज़ियों से केवल फ़ाइबर ही मिलेगा.दिब्या प्रकाश कहती हैं, “खाना पकाना एक कला ही नहीं, विज्ञान भी है. यह सब्ज़ियों को ख़रीदने, रखने और पकाने पर भी लागू होता है. गोभी को बहुत देर पकाने से इसके पोषक तत्व ख़त्म हो जाते हैं. लेकिन अगर आप इसे स्टीम करेंगे तो इसमें 100% नहीं तो 70% तक पोषक तत्व बचे रहेंगे.”कई लोग ज़मीन के अंदर पैदा होने वाली सब्ज़ियाँ, जैसे लहसुन, प्याज़ और अदरक को भी फ़्रिज में रखते हैं ताकि वे ताज़ा दिखें. लेकिन इस दौरान इनमें फफूँद लगने का ख़तरा रहता है, जो बीमारियों को जन्म दे सकता है.रॉ फ़ूड का चलन इमेज स्रोत, Getty Imagesइमेज कैप्शन, रॉ फ़ूड का एक नुक़सान यह है कि इसमें आपके पास भोजन के तौर पर विकल्प कम हो जाते हैंपिछले कुछ सालों में रॉ फ़ूड डाइट काफ़ी ट्रेंड में रही है. इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया पर रंग-बिरंगे स्मूदी बाउल्स और कच्ची सब्ज़ियों के साथ सजाई गई तस्वीरें आपने भी देखी होंगी.रॉ फ़ूड डाइट का मतलब है- बिना पका हुआ खाना. इसमें ताज़े फल और सलाद विटामिन के अच्छे स्रोत होते हैं.इस डाइट को मानने वाले कहते हैं कि खाना न तो प्रोसेस किया गया हो और न ही इसे 40-48°C से ज़्यादा गर्म किया जाना चाहिए.मौजूदा दौर में रात के समय रॉ सलाद खाने का काफ़ी प्रचलन है. लेकिन रॉ फ़ूड डाइट के नुक़सान भी हैं.सबसे पहले, इससे आपके खाने के विकल्प सीमित हो जाते हैं. विविधता कम होने से शरीर में पोषक तत्व और ऊर्जा की कमी हो सकती है.रॉ फ़ूड डाइट में प्रोटीन, विटामिन बी12 और आयरन की पर्याप्त मात्रा लेना मुश्किल होता है.यह जानना भी कठिन हो सकता है कि किस चीज़ को किस तरह खाने से ज़्यादा पोषण मिलेगा. साथ ही, कई लोग रॉ फ़ूड को पचा नहीं पाते और इस कारण इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर में पूरी तरह अवशोषित नहीं हो पाते.कुछ खाद्य पदार्थ साबुत खाने पर पर्याप्त पोषण देते हैं, कुछ काटने या पीसने पर ज़्यादा पोषक तत्व छोड़ते हैं और कुछ को पकाने पर और भी पौष्टिक बन जाते हैं.कैसी सब्ज़ियाँ खाना बेहतरइमेज स्रोत, Getty Imagesइमेज कैप्शन, स्थानीय स्तर पर पैदा की गईं मौसमी सब्ज़ियाँ सबसे बेहतर मानी जाती हैंअगर आप बाज़ार से सब्ज़ी ख़रीदकर लाते हैं तो ज़रूरी नहीं कि यह पूरी तरह से पौष्टिक हो. सब्ज़ियों के साथ एक बड़ा ख़तरा इसमें मौजूद कीटनाशक या केमिकल भी हो सकते हैं.डॉक्टर वली कहते हैं, “आजकल लौकी या पपीते जैसी सब्ज़ियों को बड़ा करने के लिए ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगा दिया जाता है. यहां तक कि गायों से ज़्यादा दूध पाने के लिए उन्हें भी इंजेक्शन लगा दिया जाता है.””गाय या भैंस का बच्चा अगर अपनी मां का दूध नहीं पी सकता है तो गाय में स्ट्रेस हार्मोन निकलता है जो दूध के साथ हमारे शरीर में पहुंचता है. फिर इंजेक्शन वाले दूध या सब्ज़ियों से कितना नुक़सान हो सकता है, इसका अंदाज़ा लगाना बहुत मुश्किल नहीं है.”इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि आप मौसमी सब्ज़ियाँ या फल ख़रीदें और स्थानीय तौर पर पैदा की गईं सब्ज़ियाँ ही ख़रीदें, ताकि उन्हें प्रिज़र्व करने की ज़रूरत न पड़ रही हो और इसके लिए केमिकल का इस्तेमाल नहीं हो रहा हो.इसके अलावा सब्ज़ियों को कम से कम 15 मिनट तक पानी में भिगोकर रखने की सलाह दी जाती है. सब्ज़ियों को धोने में खाने वाला सोडा भी इस्तेमाल किया जा सकता है.इसके साथ ही सब्ज़ियों को काटने के बाद भी धो लेना बेहतर होता है.बारिश के दिनों में हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ भी नहीं खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि गंदे पानी की मौजूदगी में इनमें बीमारी फैलाने वाले कीटाणू या बैक्टीरिया हो सकते हैं.अंत में जब बात स्वाद की हो तो सब्ज़ियों को पकाने से उनमें स्वाद भी आता है और आप उन्हें पकाकर खाना ज़्यादा पसंद करते हैं.लेकिन सब्ज़ियों को आप कैसे ख़ाते हैं इसके लिए उन्हें खाने और पकाने के तरीक़े के साथ ही हाइजीन का ध्यान रखना भी बेहद ज़रूरी है. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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