इमेज स्रोत, NASA/JPLइमेज कैप्शन, वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह पर ऐसी चट्टानें मिली हैं जिन पर लेपर्ड स्पॉट जैसे निशान दिखे हैं….मेंलाल ग्रह मंगल पर कुछ असमान्य चट्टानें दिखी हैं जिसे वैज्ञानिक संभावित जीवन के अब तक के सबसे पुख़्ता सबूत के तौर पर देख रहे हैं. नासा के परसीवरेंस रोवर को एक धूल भरी नदी की तलहटी में कुछ मडस्टोन मिले हैं जिस पर ऐसे निशान हैं जिन्हें ‘लेपर्ड स्पॉट’ और ‘पॉपी सीड्स’ नाम दिया गया है.वैज्ञानिकों का मानना है कि इन निशानों में रासायनिक प्रतिक्रियाओं से पैदा हुए खनिज मौजूद हैं, जो प्राचीन मंगल ग्रह के सूक्ष्मजीवों से जुड़े हो सकते हैं. हालांकि, इसकी भी संभावना है कि ये तत्व प्राकृतिक भूगर्भीय हलचलों की वजह से पैदा हुए हों, लेकिन एक प्रेस कांफ़्रेंस में नासा ने कहा कि ये निशान, मंगल पर जीवन होने के अबतक के सबसे स्पष्ट संकेत हो सकते हैं.ये निष्कर्ष नासा के उस मानदंडों पर खरे उतरते हैं, जिसे वह ‘पोटेंशियल बायोसिग्नेचर’ कहता है. यानी ऐसा पदार्थ या संरचना जिसका जैविक स्रोत हो सकता है, लेकिन जीवन की मौजूदगी या गैर-मौजूदगी के बारे में निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले अधिक डेटा और अध्ययन की ज़रूरत होती है.इसका मतलब है कि ये संरचनाएं जैविक हैं या नहीं इसे सुनिश्चित करने के लिए नासा आगे बढ़ सकता है.इस बारे में ‘नेचर’ मैग्ज़ीन में प्रकाशित एक अध्ययन के सह-लेखक और इम्पीरियल कॉलेज लंदन में खगोलीय वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर संजीव गुप्ता कहते हैं, “हमने पहले ऐसा कुछ नहीं देखा है, इसलिए यह बड़ी खोज है.””हमें चट्टानों में ऐसी संरचनाएं मिली हैं जिन्हें अगर धरती पर देखा जाए तो सूक्ष्मजीव प्रक्रियाओं से जुड़े जीवविज्ञान के रूप में समझाया जा सकता है. हम यह नहीं कह रहे कि हमने जीवन खोज लिया है, लेकिन हम यह ज़रूर कह रहे हैं कि इस दिशा में खोज को और आगे बढ़ाने का मज़बूत कारण है.”नासा की एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर (साइंस मिशन डायरेक्टोरेट) डॉ. निकोला फ़ॉक्स ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, “यह किसी फ़ॉसिल या जीवाश्म जैसा है. हो सकता है यह कभी किसी भोजन का हिस्सा रहा हो या फिर वह मल हो और अब वही हमें दिखाई दे रहा है.”लेकिन ये तत्व किन्हीं जीवाणुओं से बने हैं, इसकी पुष्टि तभी हो सकती है जब जांच के लिए उन चट्टानों के नमूनों को धरती पर लाया जाए. हालांकि नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी ईएसए ने नासा के सैंपल लाने के मिशन का प्रस्ताव दिया है लेकिन इस पर अभी तक अनिश्चितता है. अमेरिकी स्पेस एजेंसी फ़ंड में बड़ी कटौती का सामना कर रही है. इसे ट्रंप के 2026 के बजट में शामिल किया गया है और सैंपल लाने के वाला रिटर्न मिशन उनमें से एक है जिनके रद्द होने का ख़तरा है.आज मंगल एक ठंडा और बंजर रेगिस्तान है. लेकिन अरबों साल पहले इस पर सघन वायुमंडल और पानी होने के सबूत मिले हैं.और इसी वजह से यहां जीवन के निशान खोजने की उत्सुकता बनी हुई है. परसीवरेंस रोवर को इसी काम के लिए भेजा गया था और यह 2021 में मंगल ग्रह की सतह पर उतरा था.पिछले चार सालों से यह रोवर जेज़ीरो क्रेटर नामक इलाक़े की खोज कर रहा है, जो कभी प्राचीन झील था जिसमें एक नदी आकर मिलती थी.रोवर ने पिछले साल नदी से बनी एक घाटी के तल पर ‘लेपर्ड प्रिंट’ जैसे निशान वाली चट्टानें तलाशी थीं. यह जगह “ब्राइट एंजल फ़ॉर्मेशन” के नाम से जानी जाती है.ये चट्टानें लगभग 3.5 अरब साल पुरानी हैं और “मडस्टोन” के नाम से जानी जाती हैं, जो मिट्टी से बनी महीन दानेदार चट्टान होती है.परसीवरेंस मिशन वैज्ञानिक और इस शोध पत्र के प्रमुख लेखक जोएल हुरोविट्ज़, जो न्यूयॉर्क में स्टॉनी ब्रुक यूनिवर्सिटी से हैं, उन्होंने बताया, “देखते ही हमें लगा कि इन चट्टानों में कोई दिलचस्प रसायनिक प्रतिक्रिया हुई होगी और हम उत्साहित हो गए.”इमेज कैप्शन, मार्स पर चट्टानों की क़रीब से ली गई तस्वीरचट्टानों में मौजूद तत्वों की जांच के लिए रोवर में कई सारे उपकरण लगे हुए हैं. इस डेटा को वैज्ञानिक अध्ययन के लिए धरती पर भेजा गया. जोएल हुरोविट्ज़ कहते हैं, “हमें लगता है कि हमें रासायनिक प्रतिक्रियाओं के सबूत मिले हैं जो झील की तलहटी में जमी कीचड़ में हुई होगी. ऐसा लगता है कि ये रासायनिक प्रतिक्रियाएं कीचड़ और कार्बनिक पदार्थों के बीच हुईं और इससे नए तत्व पैदा हुए.”धरती पर ऐसी ही परिस्थितियों में, आम तौर पर तब नए तत्व बनते हैं जब जीवाणुओं की वजह से रासायनिक प्रतिक्रिया होती है.वो कहते हैं, “यह उन संभावित व्याख्याओं में से एक है कि ये निशान इन चट्टानों में कैसे बने. यह अब तक हमारे पास मौजूद सबसे ठोस संभावित बॉयोसिग्नेचर के खोज जैसा लगता है.”वैज्ञानिकों ने इस बात की भी पड़ताल की है कि बिना कार्बनिक पदार्थों या जीवाणुओं के ऐसे तत्व कैसे बनते हैं और निष्कर्ष निकाला कि रासायनिक क्रियाओं के पीछे प्राकृतिक भूगर्भीय हलचलों का भी हाथ हो सकता है. हालांकि इसके लिए उच्च तापमान की ज़रूरत होती है और इन चट्टानों को देख कर नहीं लगता कि वो कभी गर्म रही हैं.हुरोविट्ज़ कहते हैं, “ग़ैर जीव विज्ञानी तरीक़ों को आजमाने में हमें कुछ मुश्किलें आईं, लेकिन हम उन्हें पूरी तरह से ख़ारिज नहीं कर सकते.”इमेज स्रोत, NASA/JPLइमेज कैप्शन, परसीवरेंस ने मंगल ग्रह की चट्टान का सैंपल इकठ्ठा किया है. चट्टान के कोर की तस्वीर.मार्स पर रहते हुए परसीवरेंस ने सैंपल भी इकट्ठा किए हैं, जिनमें ब्राइट एंगल फ़ॉर्मेशन में पाई गई चट्टानों के सैंपल भी हैं. इन्हें केन में सुरक्षित रखा गया है और मार्स की सतह पर रिटर्न मिशन के लिए इंतज़ार कर रहा है.लेकिन नासा के इस तरह के अभियान का भविष्य अनिश्चित है क्योंकि बजट में कटौती का ख़तरा मंडर रहा है, लेकिन चीन भी रिटर्न मिशन की कोशिश कर रहा है जिसकी शुरुआत 2028 में होनी है. हालांकि फैसले पर बहस जारी है लेकिन वैज्ञानिक जल्द से जल्द इसे वापस लाए जाने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं. प्रोफ़ेसर गुप्ता कहते हैं, “हमें इस सैंपल को देखने की ज़रूरत है. मुझे लगता है कि अधिकांश वैज्ञानिक इन सैंपल्स की जांच धरती पर करना चाह रहे होंगे, इसीलिए इसे धरती पर लाने को हम प्राथमिकता दे रहे हैं.”बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित



Source link

Scroll to Top