इमेज स्रोत, Anush Kottary/BBCइमेज कैप्शन, मामले की जांच के लिए बनाई गई एसआईटी शिकायतकर्ता-गवाह को उन 17 जगहों पर ले गई, जहां उन्होंने शव दफ़नाने का दावा किया था….मेंAuthor, इमरान क़ुरैशी पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए 23 अगस्त 2025कर्नाटक में धर्मस्थला मामले की जांच कर रही एसआईटी ने उस पूर्व सफाईकर्मी को गिरफ़्तार कर लिया है, जिसने दावा किया था कि उसने इस टेंपल टाउन और इसके आसपास सैकड़ों लड़कियों, महिलाओं और पुरुषों को ग़ैरक़ानूनी तौर पर दफ़नाया था.एसआईटी के सूत्रों ने बीबीसी हिंदी को बताया कि इस शख़्स को झूठी गवाही देने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है. उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया. वहां से उन्हें दस दिनों की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया.यह पूर्व सफाईकर्मी पुलिस के सामने बतौर शिकायतकर्ता और गवाह पेश हुआ था. भारतीय न्याय संहिता की धारा 183 के तहत गवाही देने के बाद उसे गवाह संरक्षण क़ानून के तहत सुरक्षा भी दी गई थी.अपने आरोपों को बल देने के लिए इस पूर्व सफाईकर्मी ने मजिस्ट्रेट के सामने एक खोपड़ी और हड्डियों के अवशेष पेश किए थे. इनके ज़रिय़े सफाईकर्मी ने अपने दावों को सच साबित करने की कोशिश की थी.पुलिस में दर्ज की कराई गई अपनी शिकायत को सही साबित करने के लिए उन्होंने दावा किया था कि वो उस जगह पर गए थे जहां उन्होंने 1995 से 2014 के बीच एक शव दफ़नाया था.उनका कहना था कि उन्होंने अपनी अंतरात्मा के संतोष के लिए ये किया था. झूठी गवाही की क्या है सज़ा? इमेज स्रोत, UGCइमेज कैप्शन, शिकायतकर्ता मजिस्ट्रेट के सामने पूरी तरह से सिर से पांव तक काले कपड़े में गवाही देने पहुंचे थेएसआईटी ने पिछले कुछ दिनों की गहन पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ़्तार किया है.एक अधिकारी ने कहा, “जो खोपड़ी और हड्डियों के अवशेष लेकर वो आया था वे उन जगहों से नहीं लाए गए थे जहां उसने शव दफ़नाने का दावा किया था.”एक अन्य अधिकारी ने कहा कि इस शख्स ने जो खोपड़ी महिला की बताकर पेश की थी वह वास्तव में किसी पुरुष की थी. सफाईकर्मी जो खोपड़ी सबूत के तौर पर लाए थे, उसकी फॉरेंसिक जांच से ये सामने आया कि वह किसी पुरुष की थी.सेक्शन 229, भारतीय न्याय संहिता के तहत प्रावधान इस प्रकार है:”अगर कोई शख़्स किसी न्यायिक कार्यवाही में जानबूझकर झूठा सबूत देता है या झूठा सबूत तैयार करता है ताकि इसका इस दौरान किसी भी चरण में इस्तेमाल किया जा सके, तो उसे अधिकतम सात साल तक की कैद की सज़ा दी जा सकती है. इसके साथ ही उस पर अधिकतम दस हज़ार रुपये तक का जुर्माना भी लग सकता है,””अगर कोई व्यक्ति सब-सेक्शन (1) में बताए गए मामलों के अलावा किसी अन्य मामले में जानबूझकर झूठा सबूत देता है या झूठा सबूत तैयार करता है तो उसे अधिकतम तीन साल तक की कैद हो सकती है. इसके साथ ही उस पर अधिकतम पांच हज़ार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है.”इस पूर्व सफाईकर्मी ने 3 जुलाई को धर्मस्थला थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराते वक़्त सनसनी फैला दी थी. उस समय में वो ऐसे लिबास में थे, जिससे उनके सिर से लेकर पैर तक ढका था. इसके बाद वह डेजिगनेटेड मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुए और भारतीय न्याय संहिता की धारा 183 के तहत अपना बयान दर्ज कराया.एसआईटी शिकायतकर्ता-गवाह को उन 17 जगहों पर ले गई, जहां उन्होंने शव दफ़नाने का दावा किया था. इनमें से छठे स्थान और ग्यारहवें स्थान के पास ” कुछ कंकालों के अवशेष” मिले थे वहीं, 13वें स्थान पर ज़मीन के नीचे जांच के लिए ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार का इस्तेमाल किया गया, लेकिन वहां कुछ भी नहीं मिला.बीजेपी का क्या कहना हैइमेज स्रोत, Getty Imagesइमेज कैप्शन, कर्नाटक के धर्मस्थला में श्री मंजुनाथ स्वामी मंदिर पिछले एक हफ़्ते में विपक्षी पार्टी बीजेपी ने बेंगलुरु से धर्मस्थला तक कार रैली निकाली और “हिंदू धार्मिक स्थल के ख़िलाफ़ बदनाम करने की मुहिम” के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.पार्टी के राज्य अध्यक्ष बीवाई विजेंद्र ने नेताओं और विधायकों के साथ श्री क्षेत्र मंजुनाथस्वामी मंदिर के धर्माधिकारी और राज्यसभा सांसद वीरेन्द्र हेग्गाडे से मुलाक़ात की और एकजुटता जताई.वीरेन्द्र हेग्गाडे ने बीबीसी और एक समाचार एजेंसी से बातचीत में साफ कहा कि शिकायतकर्ता-गवाह के आरोप बेबुनियाद हैं और उनका मक़सद उस संस्था की छवि को धूमिल करना है, जिसने लोगों के कल्याण के लिए विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सेवा दी है.राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने इसी हफ़्ते विधानसभा में कहा था कि सरकार ने एसआईटी को पूरी छूट दी है.उन्होंने कहा था, “जांच के बाद शिकायतकर्ता-गवाह की ओर से बताई गई सभी जगहों पर कब खुदाई शुरू करनी है, इसका फ़ैसला एसआईटी ही करेगी.”वहीं अब जी. परमेश्वर ने मीडिया से कहा कि एसआईटी की जांच तब तक जारी रहेगी, जब तक यह पूरी नहीं हो जाती. उन्होंने कहा, “अगर ये कोई साज़िश है तो भी हमें जांच पूरी होने तक इंतज़ार करना होगा.”पूरा मामला क्या है?इमेज कैप्शन, कर्नाटक के धर्मस्थला में गैरक़ानूनी ढंग से शवों को दफ़नाने का दावा करके एक शख़्स ने सनसनी फैला दी थीबीती तीन जुलाई को एक अज्ञात व्हिसलब्लोअर ने आरोप लगाया था कि साल 1998 से 2014 के बीच प्रतिष्ठित धार्मिकस्थल धर्मस्थला में सफाईकर्मी रहते हुए उन्होंने एक रसूख़दार परिवार और उनके कर्मचारियों के कहने पर यहां सैकड़ों शवों को दफ़नाया था.उन्होंने आरोप लगाया था कि दफ़नाए गए इन शवों में कई महिलाएं और लड़कियां थीं, जिन्हें यौन उत्पीड़न के बाद मार दिया गया था. शिकायतकर्ता ने कहा कि वह इतने सालों तक चुप रहे क्योंकि उन्हें उस समय के उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने जान से मारने की धमकी दी थी.19 जुलाई को कर्नाटक सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया. इस टीम को शिकायतकर्ता की मदद से चिह्नित किए गए 13 स्थानों पर खुदाई का ज़िम्मा सौंपा गया.बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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