Homeअंतरराष्ट्रीयमोदी-जिनपिंग की अगली बैठक पक्की, क्या तियानजिन से निकलेगा नया संदेश?

मोदी-जिनपिंग की अगली बैठक पक्की, क्या तियानजिन से निकलेगा नया संदेश?



इमेज स्रोत, narendramodi@x9 घंटे पहलेप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाक़ात के बाद बताया कि वो शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में हिस्सा लेने चीन जाएंगे.इससे पहले वांग यी ने मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाक़ात के दौरान पुष्टि की थी कि मोदी इस महीने के आख़िर में चीन का दौरा करेंगे.बीते सात सालों में ये मोदी का पहला चीन दौरा होगा. इस दौरान उनकी मुलाक़ात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी होनी है. ऐसे में इस मुलाक़ात पर कई नज़रें टिकी हैं.आख़िरी बार मोदी और शी जिनपिंग की मुलाक़ात अक्तूबर 2024 में कज़ान में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान हुई थी. उस वक्त मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया था कि आपसी मतभेदों और विवादों को सही ढंग से संभालना ज़रूरी है ताकि शांति और स्थिरता भंग न हो.शंघाई सहयोग संगठन की बैठक 31 अगस्त से एक सितंबर तक होनी है. इसमें कम से कम 20 मुल्कों के प्रतिनिधि शामिल होंगे.मोदी ने क्या कहा?वांग यी से मुलाक़ात के बाद पीएम मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा, “चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मिलकर खुशी हुई. पिछले साल कज़ान में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मेरी मुलाक़ात के बाद से भारत-चीन संबंधों ने एक-दूसरे के हितों और संवेदनशीलताओं का सम्मान करते हुए लगातार प्रगति की है.”उन्होंने लिखा, “मैं तियानजिन में होने वाली एससीओ शिखर सम्मेलन में हमारी अगली मुलाक़ात का इंतज़ार कर रहा हूं. भारत और चीन के बीच स्थिर, भरोसेमंद और रचनात्मक संबंध क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक शांति और समृद्धि में भी बड़ा योगदान देंगे.”मोदी का चीन दौरा अहम क्यों?इमेज स्रोत, SAI AUNG MAIN/AFP via Getty Imagesइमेज कैप्शन, 2024 की इस तस्वीर में एस जयशंकर और वांग यीमोदी का चीन दौरा ऐसे वक्त हो रहा है जब एक तरफ गलवान में हुई घटना के बाद सीमा विवाद पूरी तरह सुलझ नहीं सका है, तो दूसरी तरफ भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया संघर्ष में चीन पर पाकिस्तान की मदद करने का आरोप लगा है. वहीं भारत पर अमेरिका ने 50 फ़ीसदी का टैरिफ़ लगाया है लेकिन इस मामले में उसने चीन को रियायत दी है.साल 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 भारतीय सैनिकों के साथ कई चीनी सैनिक मारे गए थे. इसके कई महीनों बाद दोनों मुल्कों में सीमा विवाद सुलझाने पर सहमति बनी और दोनों तरफ से शांति बहाल करने के लिए चर्चाओं का दौर शुरू हुआ.इस दिशा में कुछ प्रगति तो हुई लेकिन चर्चा अभी भी जारी है. वांग यी इसी के तहत विशेष प्रतिनिधियों की बैठक में हिस्सा लेने भारत आए हैं.इस साल अप्रैल में पहलगाम हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तान और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में आतंकी ढांचों को निशाना बनाया था.इस दौरान हुए सैन्य संघर्ष में पाकिस्तान की संसद में विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने दावा किया, “भारत के रफ़ाल को गिराने के लिए जे-10सी फ़ाइटर जेट का इस्तेमाल” किया गया.जे-10सी फ़ाइटर जेट चीन बनाता है. हालांकि जब चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से पाकिस्तान के दावे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है.ग़ौरतलब है कि वांग यी जल्द पाकिस्तान के दौरे पर जाने वाले हैं जहां वो कई नेताओं से मुलाक़ात करेंगे. वो चीन-पाकिस्तान विदेश मंत्रियों की रणनीतिक बैठक में भी शिरकत करेंगे.मंगलवार को चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग से एक सवाल ये पूछा गया कि भारत और पाकिस्तान दोनों के बीच तनाव है, लेकिन चीन पाकिस्तान का अच्छा मित्र है, ऐसे में भारत के साथ रिश्ते बेहतर करना उसके लिए कितना मुश्किल है.इसके जवाब में माओ निंग ने चीन और पाकिस्तान के रिश्तों को ‘हर मौसम में खरा उतरने वाला रिश्ता’ करार दिया.उन्होंने कहा, “हम अच्छे मित्र हैं, रणनीतिक सहयोगी हैं और हमारे द्विपक्षीय संबंध किसी तीसरे पक्ष से प्रभावित नहीं होते हैं और न ही किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाते हैं.”उन्होंने कहा “भारत और पाकिस्तान दोनों ही चीन के महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं. हम दोनों देशों के साथ मैत्रीपूर्ण सहयोग बढ़ाना चाहते हैं और उम्मीद करते हैं कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को सही तरीके से सुलझाया जा सकता है.”टैरिफ़ की बात करें तो अमेरिका ने भारत पर 50 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाए हैं. ये नए टैरिफ़ 27 अगस्त से लागू होंगे.जहां भारत को अब तक इसमें किसी तरह की रियायत नहीं दी गई है वहीं चीन को इसमें रियायत दी गई है.12 अगस्त को चीन पर लगने वाले टैरिफ़ की मियाद ख़त्म होनी थी, लेकिन उससे पहले अमेरिका और चीन ने एक-दूसरे पर टैरिफ़ नहीं लगाने की सहमति को 90 दिनों के लिए बढ़ा दिया. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि भारत, रूस से तेल ख़रीद कर यूक्रेन की जंग को बढ़ावा दे रहा है इसलिए उस पर अतिरिक्त टैरिफ़ लगाए गए हैं.लेकिन चीन भी रूस का भारत से बड़ा व्यापारिक साझेदार है, फिर भी चीन पर भारत से कम टैरिफ़ लगाए गए हैं.आज की बैठक में क्या हुआइमेज स्रोत, SAJJAD HUSSAIN/AFP via Getty Imagesसीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों की 24वें दौर की वार्ता के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने कहा कि स्थिति में सुधार हुआ है और सीमाओं पर शांति है.उन्होंने कहा, “शांति और सौहार्द बना हुआ है. हमारे द्विपक्षीय संबंध और भी मज़बूत हुए हैं. पिछले साल अक्तूबर में कज़ान में एक सहमति बनी और उससे हमें फायदा हुआ है. जो नया माहौल बना है, उसने हमें उन विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने में मदद की है जिन पर हम काम कर रहे हैं.”इस बैठक के दौरान वांग यी ने कहा कि पिछले कुछ सालों में भारत और चीन दोनों को झटके लगे हैं, और ये दोनों के “हित में नहीं हैं.”उन्होंने कहा, “हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अब सीमाओं पर स्थिरता बहाल हो गई है. इतिहास और वास्तविकता इस बात का सबूत है कि भारत और चीन के बीच अच्छे संबंध दोनों देशों के दीर्घकालिक हितों को पूरा करते हैं.”इससे पहले 18 अगस्त को भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी की मुलाक़ात हुई.इस दौरान एस जयशंकर ने कहा, “हमारे संबंधों में एक कठिन दौर देखने के बाद, अब दोनों देश आगे बढ़ना चाहते हैं. इसके लिए दोनों पक्षों की ओर से साफ़ नज़रिये की ज़रूरत है.”उन्होंने कहा, “हमें तीन मूल्यों- आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हितों का सम्मान के आधार पर अपने रिश्तों को आगे बढ़ाना चाहिए. दोनों के बीच न तो मतभेद विवाद बनने चाहिए, और न ही प्रतिस्पर्धा संघर्ष.”वैश्विक अर्थव्यवस्था, आतंकवाद, व्यापार जैसे मुद्दों के अलावा उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया “भारत एक निष्पक्ष, संतुलित और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था चाहता है, जिसमें बहुध्रुवीय एशिया भी शामिल हो.”इस दौरान वांग यी ने कहा, “अच्छे संबंधों के लिए ये ज़रूरी है कि सीमाओं पर शांति रहे और डी-एस्केलेशन की प्रक्रिया आगे बढ़े.”व्यापार बढ़ाने पर सहमतिइससे पहले इसी महीने भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि दोनों देश कुछ ख़ास जगहों के ज़रिए व्यापार दोबारा शुरू करने की दिशा में काम कर रहे हैं.इसमें विशेष तौर पर उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा, हिमाचल प्रदेश का शिपकी ला दर्रा और सिक्किम का नाथु ला दर्रा शामिल हैं.2020 में गलवान में हुई झड़प और कोविड महामारी के दौरान इन रास्तों से होने वाला व्यापार बंद किया गया था.बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित



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