इमेज स्रोत, Bettmann Archive/Getty Imagesइमेज कैप्शन, 9 अगस्त 1945 को जापान के नागासाकी शहर पर परमाणु बम गिराया गया था. ….मेंAuthor, फ़र्नांडो दुआर्ते पदनाम, बीबीसी ग्लोबल जर्नलिज़्म 7 अगस्त 2025कोकुरा अब अस्तित्व में नहीं है.यह शहर जापान के चार अन्य शहरों के साथ मिलकर 1963 में किताक्यूशू बना, जो आज दक्षिण-पश्चिम जापान में स्थित है. इस शहर की आबादी दस लाख से कम है.लेकिन कोकुरा का नाम अब भी जापानी जनमानस में ज़िंदा है. उसका बच जाना किसी प्रशासनिक निर्णय का नतीजा नहीं, बल्कि एक त्रासदी से बाल-बाल बचने जैसा था जो कहीं ज़्यादा दुखद और भयावह हो सकता था.1945 में अमेरिका ने परमाणु बम गिराने के लिए जापान के जिन शहरों को चुना था, उनमें कोकुरा भी शामिल था. लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के अंतिम दिनों में यह शहर चमत्कारिक रूप दो बार तबाह होने से बच गया.वास्तव में, 9 अगस्त को कोकुरा पर परमाणु बम गिराने की योजना थी और कुछ ही मिनटों बाद परमाणु बम गिराया जाना था, जिस तरह तीन दिन पहले हिरोशिमा में हुआ था. लेकिन कई वजहों से अमेरिकी वायु सेना ने कोकुरा के बजाय नागासाकी को निशाना बनाया और कोकुरा तबाह होने से बच गया.अनुमान है कि हिरोशिमा में एक लाख 40 हज़ार और नागासाकी में 74 हज़ार लोग इन बम हमलों में मारे गए थे और कई हज़ार लोग सालों तक रेडिएशन के प्रभाव को झेलते रहे.’कोकुरा की क़िस्मत’ किसी भयानक स्थिति से बाल-बाल बचने के तौर पर जापानी भाषा में एक कहावत बन गई है. लेकिन असल में हुआ क्या था?शॉर्ट वीडियो देखिएPlay video, “80 साल पहले आज ही के दिन हिरोशिमा पर गिरा था एटम बम”, अवधि 0,2500:25वीडियो कैप्शन, 80 साल पहले आज ही के दिन हिरोशिमा पर गिरा था एटम बमआसमान में बादल और धुआंइमेज स्रोत, AFP via Getty Imagesइमेज कैप्शन, नागासाकी पर जो प्लूटोनियम परमाणु बम गिराया गया, उसे शुरू में कोकुरा पर गिराया जाना था. साल 1945 में जुलाई महीने के मध्य तक अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने जापान के 12 शहरों को परमाणु हमले के लिए चुना था. इन शहरों में सैन्य अड्डे और फैक्ट्रियों जैसे रणनीतिक ठिकाने मौजूद थे.जिन शहरों में सबसे पहले परमाणु बम गिराना था, उनमें हिरोशमा के बाद ठीक दूसरा नंबर कोकुरा का था. यह शहर हथियार निर्माण का केंद्र था और यहां जापानी सेना का हथियारों का एक बड़ा गोदाम था.अगर किसी कारण से 6 अगस्त को अमेरिकी सेना हिरोशिमा पर बम नहीं गिरा पाती, तो कोकुरा ही पहला निशाना बनता.तीन दिन बाद 9 अगस्त को, सुबह-सुबह बी-29 बॉम्बर विमान कोकुरा के लिए उड़ान भर चुके थे. इन्हीं में से एक विमान बॉक्सकार ‘फ़ैट मैन’ नाम का प्लूटोनियम बम ले जा रहा था, जो हिरोशिमा पर गिराए गए यूरेनियम बम से भी ज़्यादा ताक़तवर था.लेकिन उस सुबह कोकुरा बादलों से ढका हुआ था. इसके अलावा, एक दिन पहले कोकुरा के पड़ोसी शहर यावाटा में हुई बमबारी की वजह से आसमान में काफ़ी धुआं था. इसकी वजह से विज़िबिलिटी और भी कम हो गई थी.कुछ इतिहासकारों का मानना है कि कोकुरा की फैक्ट्रियों ने जानबूझकर कोयला जलाकर शहर के ऊपर धुएं की चादर बना दी थी, ताकि बार-बार हो रहे हवाई हमलों से कुछ हद तक बचा जा सके.अमेरिकी सैन्य दस्तावेजों और 9 अगस्त के मिशन में शामिल विमानों में से एक पर सवार न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार विलियम लॉरेंस की रिपोर्ट के मुताबिक़, बी-29 विमानों ने कोकुरा के ऊपर तीन बार चक्कर लगाया.अमेरिकी वायु सेना को आदेश था कि परमाणु बम तभी गिराए जाएं जब टारगेट आंखों से साफ़ तौर पर देखे जा सकते हों, जिससे कि ज़्यादा से ज़्यादा तबाही हो सके.लेकिन इससे पहले कि टारगेट की पुष्टि हो पाती, कोकुरा की ज़मीन पर मौजूद सैनिकों ने विमानों को देख लिया और उन पर गोलीबारी शुरू कर दी.तभी बॉक्सकार उड़ा रहे मेजर चार्ल्स स्वीनी ने नागासाकी की ओर बढ़ने का फ़ैसला किया, क्योंकि उड़ते-उड़ते विमान काफ़ी ईंधन भी जला चुके थे.इस तरह कोकुरा दूसरी बार भी बच गया.अमेरिका की रणनीतिइमेज स्रोत, Bettmann Archive/Getty Imagesइमेज कैप्शन, एक अनुमान के अनुसार, नागासाकी में परमाणु बम हमले में 74 हज़ार से अधिक लोग मारे गए.मार्च 1945 से अमेरिकी विमान जापान पर लगातार हमले कर रहे थे. इन हमलों में आग लगाने वाले बमों का इस्तेमाल होता था. ये बम शहरों को राख में बदल रहे थे.सिर्फ़ 9 मार्च की रात को टोक्यो पर हुए अकेले हमले में तक़रीबन 83 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हुई और 10 लाख से ज़्यादा लोग बेघर हो गए.लेकिन जब अगस्त में बी-29 विमान कोकुरा के ऊपर पहुंचे, तो शहर में लगभग कोई भी नुक़सान नहीं हुआ.कोकुरा को संभावित परमाणु हमलों के साथ-साथ आग वाले बमों से भी बचा लिया गया था. अमेरिकी सैन्य अधिकारी चाहते थे कि हमलों से पहले इन शहरों को जितना हो सके संरक्षित रखा जाए, जिससे कि वे परमाणु हथियारों से होने वाले नुक़सान का बेहतर अध्ययन कर सकें.नागासाकी शुरुआत में उन शहरों की सूची में नहीं था, जिन्हें टारगेट के लिए चुना गया था. लेकिन अमेरिका के उस समय के सेक्रेटरी ऑफ़ वॉर हैरी स्टिमसन ने इसे बाद में शामिल कराया.स्टिमसन, तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन को इस बात पर मनाने में सफल रहे कि जापान की पूर्व राजधानी क्योटो को तबाह करना युद्ध के बाद जापान और अमेरिका के बीच सुलह को बेहद मुश्किल बना देगा.हालांकि, अमेरिकी इतिहासकारों का दावा है कि क्योटो को बचाने के पीछे स्टिमसन की निजी भावना भी थी. वे पहले कई बार जापान जा चुके थे और माना जाता है कि उन्होंने अपना हनीमून भी क्योटो में बिताया था.राहत और दुखइमेज स्रोत, Kitakyushu City handoutइमेज कैप्शन, किताक्यूशू एशिया के सबसे हरे भरे शहरों में गिना जाता है.15 अगस्त 1945 को जापान के सम्राट हिरोहितो ने जापान के बिना शर्त आत्मसमर्पण की घोषणा की. कोकुरा, जो अब किताक्यूशू के नाम से जाना जाता है, तबाही से तो बच गया लेकिन चिंता से नहीं बच पाया.जब कोकुरा के लोगों को ये बात पता चली कि नागासाकी पर जो बम गिराया गया, उसे उनके शहर पर गिराया जाना था तो दुख और सहानुभूति की भावना के साथ राहत का मिला जुला भाव उमड़ आया.किताक्यूशू में नागासकी एटॉमिक बॉम्ब मेमोरियल है, जो हथियारों के एक पूर्व गोदाम के मैदान में बने पार्क में स्थित है. इस स्मारक पर शहर के बाल-बाल बचने और नागासाकी की त्रासदी दोनों की इबारतें लिखी हैं. यहां 1973 के बाद से ही हर साल मारे गए लोगों की याद में 9 अगस्त को वार्षिक आयोजन किया जाता है.किताक्यूशू सिटी म्यूजियम ऑफ़ पीस को भी 2022 में खोल दिया गया. इन दोनों शहरों के बीच दशकों में मित्रता के संबंध भी विकसित हुए हैं और खुले तौर पर ये स्वीकार किया जाता है कि उनकी किस्मत आपस में जुड़ी हुई है.लेकिन किताक्यूशू ने खुद भी बड़े बदलावों का सामना किया है. जापान के पुनर्निर्माण के दौरान यह औद्योगिक शहर इतना प्रदूषित हो गया था कि इसके डोकाई बे की जलधारा लगभग ख़त्म हो गई थी.आज, यह शहर एशिया के सबसे हरे-भरे शहरों में से एक के रूप में जाना जाता है. यह संभव हुआ है रिन्यूएबल एनर्जी में दशकों के निवेश के कारण. यह एक ऐसा शहर है जो अतीत को कभी नहीं भूलेगा, लेकिन जिसने दृढ़ता से भविष्य की ओर कदम बढ़ाया है.बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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